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केसरिया भारत: राष्ट्रीयता के पक्के रंगकेसरिया भारत: राष्ट्रीयता के पक्के रंग

अभी-अभी: घटनाक्रम

समानार्थक अथवा सामानर्थक शब्द

ऐसे रोबोट भारत और विश्व में शांति हेतु काम किए जा रहे हैं, इनसे प्रोत्साहित न हो वरना किसी दिन अगर शौचालय में आपका नाड़ा न खुले तो आप उसे भी नहीं काट पाएंगे! सोचिए, तब क्या होगा?

एक वैज्ञानिक जी ने एक रोबोट बनाया! रोबोट के काम करने की तकनीक थी कि वो आवाज सुनकर उसके अर्थ लगाकर काम कर देता था। वैज्ञानिक जी उसमें शब्दावली का ज्ञान भरते-भरते मुरही-चाय खाने लगे। इस अनुपम सुख के आगे उन्होने यूं सुध-बुध खोयी और यूं उनपर आलस छाया कि रोबोट का भाषा-ज्ञान कमजोर रह गया।

रोबोट में कमी रह गयी कि वो पूरा वाक्य न सुनकर सिर्फ एक शब्द से बात पकड़ने की कोशिश करता। अगर आपको समझ न आया तो दृष्टांत देते हैं….

-> बिल्ली ने रास्ता काटा।

-> सोनू ने केक काटा।

-> प्रेमी प्रेमिका ने अपना-अपना सील काटा।

-> माता जी ने ताज़ा नेनुआ काटा।

-> ताऊ ने आज बीस किलो का खस्सी काटा।

-> ट्रेफिक वाले ने मजनू का चालान काटा।

-> फी न भरने पर मुन्ना के टीचर ने स्कूल से उसका नाम काटा।

-> कुत्ते ने अवधेश बाबू को टांग में काटा।

-> दर्जी ने सलवार का कपड़ा काटा।

-> मेहुल के दोस्त ने मेहुल का च… काटा।

-> कुछ होनहार युवकों ने एक शोषक युवक को बड़े प्रेम से काटा।

अब काटना शब्द तो गुनाह सदृश्य लगता है, कई चीजों का कटना गुनाह है भी, सो रोबोट भाई ने काम कर डाला। अब वैज्ञानिक जी ने मुरही-चाय का नतीजा था कि देश में रेल का टिकट कटना भी बंद हो गया।

भाइयों! ऐसे रोबोट भारत और विश्व में शांति हेतु काम किए जा रहे हैं, इनसे प्रोत्साहित न हो वरना किसी दिन अगर शौचालय में आपका नाड़ा न खुले तो आप उसे भी नहीं काट पाएंगे! सोचिए, तब क्या होगा?

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