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केसरिया भारत: राष्ट्रीयता के पक्के रंगकेसरिया भारत: राष्ट्रीयता के पक्के रंग

राजहंस

मैं राजहंस हूँ। आपसे ये कहना है कि सोचना कोई बीमारी नहीं है। ये एक तरह की व्यस्तता है। लोग श्रम करते हुए शरीर से, सोचने वाले उसी तरह, दिमाग़ से मजबूत हो जाते हैं। हर एक बिम्ब के समांतर, दर्पण के आयाम में, एक प्रतिबिम्ब चलता है। अगर वो एक, एक नहीं तो कम से कम, एक और एक के सापेक्ष तो जरूर समझ आ जाते हैं। दुनिया एक नियम से चलती है, पागल चलाते तो मुश्किल था, लेकिन दिमाग़ वाले चलाते हैं, इसलिए सोचते हुए आप एक दिन उनके जूते में पैर उतार पाते हैं। सब कुछ का एक पैटर्न और नियम है, ऊँची दीवार पर लिखा हो या ऊँची आवाज में मंच से क्यों न बोला जाये पर ठहरकर देखिए आप भी, संभवतः आपको भी कुछ दिखा हो!

धर्म-अध्यात्म

वाल्मिकीय रामायण से उद्धृत लक्ष्मण जी के ऐसा कहने पर सीता माता रोने लगीं। उन्होने कहा – लक्ष्मण! मैं श्री राम से बिछुड़ जाने...

चर्चा में

यंगिस्तान में अचानक चर्चा शुरू हो गयी कि आधा इस्तान भूखा है, पूरा इस्तान बेरोजगार है, इस्तान की लड़कियां पिंजरे की मैना है, इस्तान...

चर्चा में

पुराने लोगों ने सोचा नहीं होगा कि उनकी अच्छाइयों को जानने वाला, जपने वाला संसार एक ऐसे समय तक जाएगा जब उसे अच्छाइयों के...

Uncategorized

कई विरोधी वर्गों को जोड़ने के लिए एक काल्पनिक दायरा बनाया जा रहा है और ये ईकवेशन-मनेजमेंट और ये इंजीनियरिंग ने सारा घटनाक्रम धुंधला...

प्रस्तुति एवं COPYRIGHT © 2022 MRITYUNJAY MISHRA