ये स्वास्थ्य की बात तभी है जब कि…
जैसा कि आप देख पा रहे हैं कि एक बोतल में दूध है। दूध की बात ही क्या, जिस भैंस से दूध प्राप्त हुआ है, वो भैंस भी पहले ही शुद्ध कर ली गई थी। इस तरह की प्रक्रिया के बाद प्राप्त हुआ शुद्ध भैंस का शुद्ध दूध भी शुद्ध होगा। अगर आपको शुद्ध दूध पचता है तो आप बिना संदेह दूध पी लीजिए।
दूसरी बोतल में शुद्ध जल है, जल भी दो प्रक्रियाओं से शुद्ध किया गया है। पहले तो रेल छाप कंपनी के कुएँ को शुद्ध किया गया फिर उससे निकालकर जल को एक और प्रक्रिया के तहत शुद्ध किया गया। पानी पीने के लिए बिल्कुल उपयुक्त है और कहें कि ये विटामिन और प्रोटीन से युक्त भी है।
ऐसा किताबों में लिखा है कि जल में दूध और दूध में जल, सुविधानुसार, साधनानुसार, इच्छानुसार और यहाँ तक कि स्वादानुसार भी, मिलाने की पुरानी परंपरा है। पुरातन काल में तो मनीषियों ने इसपर विस्तृत प्रयोग भी किए थे। इसी परंपरा का पालन करते हुए हम भी इन्हें आपस में मिला सकते हैं।
इससे एक लाभ है कि दो लीटर मिश्रण में हमें एक लीटर पानी के विटामिन, प्रोटीन, खनिज लवण आदि मिल जाएंगे और एक लीटर दूध से हमें मोटापा, मनोरंजन और दूध की सफेदी भी मिल जाएगी। हमें एक ही पैक लेना होगा, एक ही बार upi करना होगा, एक्सपाइरी डेट भी एक ही बार देखना पड़ेगा, यहाँ तक कि एक बोतल कम बर्बाद होने से ओजोन परत का गोल सा होल भी पूर्व संध्या की तरह पूर्ववत हो जाएगा।
अब चूंकि आपको दूध और पानी दोनों से प्रीति है, कहिए कि एक के बिना दूसरे नहीं हैं, ये प्रकृति है, आपकी तय नीति है तो ये मिश्रण दो लीटर दूध से सस्ता पड़ेगा, या दो लीटर पानी के दाम में एक लीटर उजला माल पानी बनकर मिलेगा! नाम पर जिच मत करिए। अवसरानुसार , कभी सुधा, कभी अमृत कहिए। स्वास्थ्य की गारंटी हम देते हैं। अगर आपके शहर में शुद्ध भैंस और रेल छाप जल का कारखाना है तो आप जन्मजात शतायु हैं, आपको यूँ ही लंबा जी जाना है।

















