ये शक्त नारी हैं। ये इतनी शक्त हो गईं कि इनकी हिंदी कमजोर हो गई...इन्होंने अपनी डिटेल सख्त नारी लिख दी है। ये बहुराष्ट्रीय कंपनी में काम करती हैं..मतलब बहुराष्ट्रीय कंपनी में जो भी काम होता है, ये सब करती हैं। ये सब करके इन्हें स्वाबलंबन, स्वतंत्रता, स्वाधीनता, सुख, समृद्धि सब मिलते हैं। इन सुविधाओं का समुचित लाभ ये रात आठ बजे से लेकर सुबह दो बजे तक लिया करती हैं। इन्होंने काम के सामने काम और काम के बाद फिर काम और काम पर काम को वरीयता देकर खुद पर लगा कामिनी का टैग हटाकर कामवाली का तमगा ले लिया है। इनके लिए नाकाम होना, न होने से भी ज्यादा दुखद है।