देख बेटा, मौखिक परीक्षा में मास्टर जी बड़े खराब हो जाते हैं, वो खुश हुए तो पास कर देंगे, हल्का फुल्का सवाल जैसे कि तुझसे अपना नाम पूछेंगे अगर रूष्ट हुए तो…अपने पिता का नाम तुझसे पूछ लेंगे!
बालक ने बोला कि ऐसा हो तो क्या कहना है! पिता ने कहा, तू उनका ही नाम बोल देना! नाम का आधा बाप का नाम होता है, आधे मार्क्स मिल गए तो भी तू पास हो जाएगा। बालक ने पूछा कि क्या मास्टर साहब उसके पिता का नाम, उससे नहीं पूछेंगे? ऐसा होता तो अच्छा होता! मम्मी ने बचपन से बाप का नाम रटाया था, सबसे परिचित शब्द यही था इसके लिए!…पिता जी ने कहा कि साधारणतः ऐसा नहीं होता, ये क्वेश्चन वीवीआई/गेस पेपर में नहीं है। उसके पिता ने किताब में छपने लायक कोई बड़ा काम नहीं किया है, कम से कम, उनकी जानकारी में।
बालक ने सबसे पहले दोस्तों से परीक्षक का नाम पता कराया। ‘मटुक मास्टर जी हैं!’ बालक ने नाम रट लिया। बारी आईं सामने खूंखवार मटुक जी मानो घात लगाए बैठे हैं। बालक ने कुदरत को प्रणाम किया।
पहला सवाल…मूर्ख देश का मूर्ख मंत्री कौन है?
बालक ने तपाक से जवाब दिया, मटुक मास्टर।
मटुक जी को मानो सस्ता चारा मिल गया…मार्क्स लिखे, जीरो।
मूर्ख बदौलत के बाप का नाम कौन था?
मटुक मास्टर!
मास्टर जी ने मानो, आँखों से गाली दी, एक जीरो और बढ़ा दिया, मूर्ख देश के मूर्खता संग्राम का नेतृत्व किसने किया?
मटुक मास्टर!
अब तो ये घोड़े की लीद और जीरो बैठाने लायक भी नहीं है, लेकिन रुलाकर भेजना है इसको। मास्टर जी ने कलम छोड़ी और जम कर बैठे! मूर्ख ग्रह पर सबसे पहले कौन उतरा?
मटुक मास्टर!
मौज महल किसने बनवाया?
मटुक मास्टर!
मूर्ख देश की खोज किसने की?
मटुक मास्टर!
मूर्ख सागर को तैरकर किसने पार किया?
मटुक मास्टर!
मूर्ख शिखर को लांग जंप करके किसने पार किया?
मटुक मास्टर!
मास्टर जी ने बोला कि अब व्यक्ति का नाम बहुत पूछ लिया, अब देखा जाए कि बच्चा किस लेवल का बोतू है! अर्ज किया, दिन कब होता है?
जब मटुक मास्टर उठते हैं!
मास्टर जी की भौवें चमक गईं, साल कब बदलते हैं।
जब मटुक मास्टर की तरक्की होती है।
मूर्ख सभ्यता के अवशेष कहाँ मिलते हैं?
जहाँ मटुक मास्टर रहते हैं।
सभ्यता शुरू कब हुआ?
जब मटुक मास्टर जन्मे!
अफ्रीका में कौन सा घास का मैदान है?
जहाँ मटुक मास्टर जी चरते हैं।
मास्टर जी तो फेंककर मारते बस पर उन्होंने फिर पूछा, सुनामी कब आती है?
जब मटुक मास्टर जी फिरते हैं।
…बहुत हुआ! हाइड्रोजन और ऑक्सीजन मिलने से क्या बनता है?
जो मटुक मास्टर पीते हैं।
धरती के चक्कर कौन लगाता है?
मटुक मास्टर जिसकी लेते हैं।
…क्या लेते हैं बे? …पर मास्टर जी को अकस्मात कुछ समझ आया, विश्वसुंदरी कौन है?
मटुकाइन मास्टर जी।
मटुक मास्टर चमत्कृत रह गए! क्या बच्चा है यार!
देश कौन चलाता है?
मटुक मास्टर!
सिंहासन कौन हिलाता है?
मटुक मास्टर!
गर्द कौन फाड़ता है?
मटुक मास्टर!
बला कौन उतारता है?
मटुक मास्टर!
मास्टर ब्लास्टर कौन है?
मटुक मास्टर जी!
साला…कुछ भी बोलवा सकता हूँ इससे! तुम्हारा घर कौन चलाता है?
मटुक जी!
मटुक जी थोड़ा हिचकिचाते हुए बोले, घर में रोज धनिया कौन बोता है?
मटुक जी!
तकिया डालकर, तकली निकालकर, बिस्तर पर कौन सोता है?
मटुक जी!
मटुक जी भावविह्वल हो गए! ये तो अच्छा बच्चा निकला! पूछा कि साईज की नाप कौन लेता है?
मटुक जी!
मेहनत कौन करता है, चांप कौन लेता है?
मटुक जी!
मास्टर साहब ने कलम फिर उठाया, दो जीरो बैठा चुके, अब करें तो क्या करे? पूछा, गरम दूध की भांप कौन लेता है?
मटुक मास्टर!
किसकी बदौलत मैदान साफ है?
मटुक मास्टर!
कौन तुम्हारा बाप है?
मटुक मास्टर!
मटुक मास्टर आंसुओ में टूट गए! अब जाकर इन्होंने बच्चे की प्रतिभा को पहचाना है। ये बच्चा कलियुग के कलि का सगा नाना है, इसे ही दुनिया को आगे ले जाना है! उन्होंने कहा कि वो धन्य हुए कि ऐसा पासार्थी उनके द्वारे, उनकी परीक्षा लेने आया। उन्होंने बालक को गोद में उठा लिया और जी भर के पुचकारा। एक लॉलीपॉप दी, एक और दी, कहा कि ये घर के लिए है। फिर उन्होंने मार्क्स में चढ़कर बैठे, जीरो और उसपर एक जीरो के पहले एक लिख दिया, अब वो सौ हो गए! मटुक मास्टर जी फिर अपनी कुर्सी पर बालक को बिठाकर वीतरागी हो गए!






















