मैं बाबा जी, कुशलतः कुशलता की कामना करता हूँ, ठीक वैसे ही जैसे, अच्छा अच्छे की, बुरा बुरे की कामना करता है। कुछ नहीं रहेगा, यहाँ का वहाँ क्या, यहाँ का यहाँ भी नहीं रहेगा। आज बेचकर खाओगे, कल भूख से मर जाओगे! बुराई से बुराई जन्मती है, बाँकी सब भ्रम है, थोड़ा वक्र, थोड़ा चक्र, ये तत्र, वो यत्र…किसी बुरे के साथ बुरा करके, उसके कर्म हल्के और ख़ुद के भारी न करें! चार कंधों पर चढ़ने के लिए, अधर्म की सवारी न करें!