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केसरिया भारत: राष्ट्रीयता के पक्के रंगकेसरिया भारत: राष्ट्रीयता के पक्के रंग

डाक साहेब

ये डाक साहेब हैं। एक बार इन्होंने एक सुस्त मेढक पकड़ा..ब्लेड से ये उसका उदर खोलकर उसकी सुस्ती दूर ही करने वाले थे कि पीछे से माता जी का चप्पल उड़ता आया और सीधे शाबाशी स्वरूप उनकी गर्दन पर पड़ा। ब्लेड बहक-कर अपनी उंगली पर चल गया। जब तक ये रांड़ रुदन करके संयत होते, मेढक जी अपना पेट लेकर चंपत हो लिए। उनका ये जलवा देखकर इन्हें बड़ा संतोष हुआ। इनकी उंगली का जो भी हो पर मेढक की सुस्ती का सस्ता इलाज हो गया..तभी से ये और दुनिया इनमें डॉक्टर-स्वरूप देखती है।

बात के बंदर

ऐसा किताबों में लिखा है कि जल में दूध और दूध में जल, सुविधानुसार, साधनानुसार, इच्छानुसार और यहाँ तक कि स्वादानुसार भी, मिलाने की...

प्रस्तुति एवं COPYRIGHT © 2022 MRITYUNJAY MISHRA