चर्चा में
पूर्वसंध्या
जब भी ये खुशिया, जब भी ये उल्लास इस बेलगाम रफ्तार से आता है, खुद से इतना जरूर पूछियेगा कि आपका इन खुशियों पर कितना अधिकार है? नहीं। एक कमजोर से लेखक का आपको ये कहना अलग है कि वो आपका भय दुहता नहीं है बल्कि अपना डर कहता है।
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