आँख का अंधा नाम नयनसुख! मैं आनंद हूँ! क्या था और आज क्या हो गया...प्यार ही तो किया था कोई दंगा नहीं... दिल टूटकर टेलकम पाउडर बन गया, शरीर व्याधियों का घर है...दुख है, भवसागर है, कड़ाके की शीतलहर में ओढ़ी फटी हुई चादर है! ये दुनिया बड़ी ... प्यार करने वाले के पास पहले तो एक फ्लावर होता है, फिर एक और हो जाता है। प्यार जहर का स्वाद है और जिसे आप भावुकता कहते हैं, वो तो साक्षात जंगल की आग है। अंत में आपको पता चलेगा लोग आपसे नहीं है और आप ब्रह्मांड में पृथ्वी की तरह अकेले हैं, इर्द-गिर्द सिर्फ विलास है, जूठा खाना है, मीठा जहर या सड़ा हुआ मांस है।