कुछ बच्चों का ताऊ हूँ। सत्तर साल से खटिया तोड़ रहा हूँ, खटिए पर हूँ सो सबको शक्ल, अकल और बकल सप्लाई कर रहा हूँ। कायदे में रहोगे तो प्रत्यक्ष फायदे में रहोगे, खटिया खड़ी करने की सोची तो हमने अपनी तेलप्यारी आपके पिछवाड़े में कोची! सब कुछ नियम से होगा...संयम से होगा... गाँव बड़ा है, बुजुर्ग जरूरी हैं, खासकर कि वो जिन्होंने अपनी खटिया तोड़ी हैं। हमें गाँव का आदर्शों का गाँव बनाना है, बाहर बड़ा खराब जमाना है।
लोग आयेंगे, जाएंगे, सरकारें बनेंगी, गिरेंगी, कानून बनेंगे, मिटेंगे, ये देश/आप समृद्ध रहने चाहिए, इस देश का लोकतंत्र/आपकी इच्छा अमर रहनी चाहिए...बांकी सब कुर्सी...