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केसरिया भारत: राष्ट्रीयता के पक्के रंगकेसरिया भारत: राष्ट्रीयता के पक्के रंग

दादा

हमारा नाम दादा है, जन्म लेने से पहले ही हम दादा बन चुके थे। फिर धरती पर आकर हमने खूब दादागिरी की। मेरे पिताजी को मूढ़ी खाने का और माता को चाय पीने का शौक था। हमने भी दाँये हाथ से चाय पी और बाँये हाथ से मूढ़ी खायी। फिर लगा कि मूढ़ी में स्मेल है! हाथ बोदलू कैसे? हमने मूढ़ी फेंकी और उसी हाथ से धू-धू करना शुरू किया। अब हमने सब फेंक दिया, एक हाथ से चश्मा पकड़ा और दूसरे हाथ में अखबार…फोटो खिंचा रहे हैं!

जेन जी-डी-पी

फिर पासार्थी का बाप आया, 'इसमें कोई टैलेंट है नहीं ददा! इकरा किताब दीजिए! साला जिंदगी भर लिख और खुद के लिखल पढ़!' उसका...

प्रस्तुति एवं COPYRIGHT © 2022 MRITYUNJAY MISHRA