मैं फ़िल्मी हूँ, पर मीठा मत बोलिये! मैं एक पहचान में बंधकर नहीं जीना चाहता। मैं खट्टा, तीता, कड़ुआ, नमकीन सब होकर जीना चाहता हूँ! इस दुनिया को प्यार चाहिए, इश्क़ चाहिए, हर फ़्लेवर का, हर दिशा, हर द्वार से, बीच मड़ैया, गोल गढ़ैया, भीतर तक उतार के। जब दुनिया में हर जगह प्यार होगा, तभी नीचे और उपरवाले का, आगे और पीछे वाले का, अगल और बगल वाले का, पाईप और टनल वाले का उद्धार होगा! प्यार का प जब तक न निकले, मुहब्बत के, म के मुँह में न उतरे, तब तक चैन न मिले, मेरा क़ातिल मुझे क़त्ल न करे, ऐसी कोई रेन न मिले!