ये पासार्थी हैं, ये पास-शाला समय से आते-जाते हैं, तब तक ये क्रम चलता रहेगा, जब तक इनका समय न आ जाए। पास होने के लिए जो जरूरी है, सब इनकी उदात्त मजबूरी है। इनको ये बताया गया है कि अगर ये पास न हुए तो कोई इन्हें पास नहीं बुलाएगा! पेट और पेट के गेट का रेट, यूँ बढ़ा है कि घास डालना तो दूर, घोड़ा होकर भी वो गधा ही कहलाएगा।