चर्चा में
राजद्रोह
राजा भी तो राज्य की मूलभावना का प्रतिनिधित्व करता नहीं, वो राष्ट्रनीति नहीं राजनीति का अनुगामी बन गया है। राजा का आदेश बनकर जब राष्ट्र खुद को व्यक्त न करे तो राजा खलनायक ही बनेगा। अब खलनायक को चिढ़ाने का तो सबको हक़ है। लेकिन राष्ट्रद्रोह के लिए किए प्रावधानों को थोड़ा प्रचारित करना चाहिए।
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