मै लेखक हूँ। असल में तो ये बात है कि लिखना कृत्रिम है। बोलना स्वाभाविक है। किंतु बोली बात दूसरों की छोड़िए, खुद ही भूल जाता था, इसलिए लिखना जरूरी हो गया। एक और बात है, लिखा हुआ चूंकि रह जाता है, इसलिए इंसान जो बकता है, वो थोड़ा मेकअप करके लिखता है। कुछ भी लिखा जा सकता है, दुनिया में न कोई घटना, न कुछ फटना, न कुछ लटकना, लेखनातीत है। कलम तलवार नहीं होती, कलम अंधे की लाठी है, लोग उपयोग करते हैं, जिसको जैसी समझ आती है। कागज और कलम बनाने वाले लंबा जियें, उन्होंने पहली बार समय को फ्रीज करने की मशीन बनाई है।