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केसरिया भारत: राष्ट्रीयता के पक्के रंगकेसरिया भारत: राष्ट्रीयता के पक्के रंग

लेखक महोदय

मै लेखक हूँ। असल में तो ये बात है कि लिखना कृत्रिम है। बोलना स्वाभाविक है। किंतु बोली बात दूसरों की छोड़िए, खुद ही भूल जाता था, इसलिए लिखना जरूरी हो गया। एक और बात है, लिखा हुआ चूंकि रह जाता है, इसलिए इंसान जो बकता है, वो थोड़ा मेकअप करके लिखता है। कुछ भी लिखा जा सकता है, दुनिया में न कोई घटना, न कुछ फटना, न कुछ लटकना, लेखनातीत है। कलम तलवार नहीं होती, कलम अंधे की लाठी है, लोग उपयोग करते हैं, जिसको जैसी समझ आती है। कागज और कलम बनाने वाले लंबा जियें, उन्होंने पहली बार समय को फ्रीज करने की मशीन बनाई है।

जेन जी-डी-पी

अब कारोबार इतना बढ़ गया कि डायरेक्टर के भी दस-बारह और रायता रिक्रूटमेंट हुए। अब सबका एक महाडायरेक्टर मिल्की वे के ऑफिस में बैठता...

चर्चा में

यहाँ वैज्ञानिक को दार्शनिक के पड़ोसी होने का समुचित फायदा मिला। परिस्थितियों के भंवर में, घाट से घाट पटक खाकर, हिलोर कर कपड़े को...

चर्चा में

राजा भी तो राज्य की मूलभावना का प्रतिनिधित्व करता नहीं, वो राष्ट्रनीति नहीं राजनीति का अनुगामी बन गया है। राजा का आदेश बनकर जब...

जेन जी-डी-पी

विस्फोट क्या होता है? असल में ये एक अनियंत्रित अथवा नाप-तौल की सीमा से परे, क्रिया अथवा प्रतिक्रिया होती है। आपने देखा होगा कि...

प्रस्तुति एवं COPYRIGHT © 2022 MRITYUNJAY MISHRA