मूर्ख-पत्रिका

नेता जी का वाद

इसके बाद नेतास्थान में हाहाकार मच गया। संदेश प्रचारित हो गया कि भयंकर दमन हो रहा है, भोली-भाली जनता को संख्या गणित में हराकर अब आताताई लोग उन्हें शरीर से रुग्ण करना चाहते हैं। ये दूषित पानी पीने से आने वाली सात पीढ़ियां भेंगी जन्म लेंगी…

नेता जी, बड़े नेता जी से मिलने गए। बड़े नेता जी को उनकी मंशा मालूम थी। हर दूसरे सप्ताह मुर्गा तोड़ने आ धमकते थे। बड़े नेता जी का आज उपवास था, मुर्गा तो दूर, उन्हें पुदीना तक नहीं छूना था। उन्होंने दरवाजे पर अपने लठैत को कह रखा था कि छोटा नेता आए तो ब्रेड जैम खिलाकर लौटा देना…खुद लौट जाएगा, खायेगा भी नहीं।

छोटे नेता जी का आत्मसम्मान घायल हो गया, वो अपने गाड़ी में आके बैठे और चमचे से कहा, “…घोर अपमान हुआ है!” इसके बाद चमचे जी ने अपने क्षेत्र में हर जगह पोस्टर लगवा दिए, “नेतास्थान नहीं सहेगा अपमान!… जहाँ हो अपमान, वहाँ नहीं करना जलपान!”

पता चला कि उन्होंने नई पार्टी बना ली, नाम रखा, कुक्कुट पार्टी। जनता समझ नहीं पाई तो फिर बताया गया कि पार्टी का नाम कूट कूट पार्टी है, ये भ्रष्टाचार और जनता का अपमान करने वाले दंभी नेताओं का दंभ कूटने के लिए बनी है, कुक्कुट तो सिर्फ स्पेलिंग मिस्टेक है। कहा गया कि नेता जी के परिवार के सदस्य, जनता, भी तब तक दिन में एक ही बार जलपान करे, ये व्रत है, जो नेतास्थान के उन्नति के लिए आवश्यक है।

अब चुनाव आए। नेता जी मंच पर खड़े हुए, भाषण शुरू ही होता कि मंच टूट गया, चलतु गुणवत्ता का मंच था, एक तो बजट वैसे ही कम था ऊपर से … नेता जी का एक टांग कोमा में चला गया…अब वो चमचे को बोलें क्या! …और अचानक से संदेश प्रसारित हुआ कि जब तक नेतास्थान में जनता और जननेता को सही स्थान न मिले, नेता जी ‘एकं टांगें तिष्टति’ नामक एक कुदरती व्रत रखेंगे। जनता से अपील की गई कि वो भी एक टांग भरसक, अवसर के अनुसार उठा लिया करें। फिर तो नेतास्थान की धरती का बोझ आधा हो गया, धरती पर खड़ी टांगों की संख्या आधी हो गई।

धरती को धर्म कांटा पर चढ़ाने पर नेता जी की टीम को उत्साहजनक परिणाम मिले। नेता जी आश्वस्त थे कि अभी जय हो, तय हो होकर रहेगा। किंतु …

गुस्से में नेता जी ने आज खाना नहीं खाया, लिहाजा गैस बनी…फिर पेट में दुख पैदा हो गया। खबर फैल गई कि नेता जी की किसी षडयंत्र के शिकार हो गए हैं…उन्होंने जब से नेतास्थान के सबसे आखिरी गांव में सबसे गरीब आदमी के चापाकल का पानी पिया तब से उनकी तबियत बिगड़ती जा रही है!

इसके बाद नेतास्थान में हाहाकार मच गया। संदेश प्रचारित हो गया कि भयंकर दमन हो रहा है, भोली-भाली जनता को संख्या गणित में हराकर अब आताताई लोग उन्हें शरीर से रुग्ण करना चाहते हैं। ये दूषित पानी पीने से आने वाली सात पीढ़ियां भेंगी जन्म लेंगी…

…और उसके बाद चापाकल का नाम बदलकर टुल्लू पंप हो गया। हाँ ठीक है कि जीतने वाले ने ही कानून पास करवाया पर…नेता जी इस कानून पर नजर रखने हर सप्ताह…

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