…आज हम आए हुए हैं, मार्दश माल महाविद्यालय के प्रवेश परीक्षा को कवर करने! आप सब जानते हैं कि MMMET कितनी बड़ी परीक्षा है! माल से लेकर मालगाड़ी तक सब इसी टेस्ट से निकलने वाले हैं!..
कैमरामैन ने कैमरा घुमाया! उधर एक दुकान खुली है, नाम है,
माल वाला मल-खान!
जुगाड़ की चालू दुकान!
भीड़ काहे को! अपन उधर चलते हैं। कैमरा वाला फिर शॉट लेने के लिए तैयार है, हमने माइक मलखान की जुबान से लगाया! उन्होंने पूछा कि क्या चाहिए? हमने कहा, जो आप देते हैं! उन्होंने पूछा, कहाँ से हो? हमने कहा कि पासार्थी हैं। लगते नहीं, माइक लेकर कोई प्रार्थना करने तो नहीं आता! अपन सरक लिए। एक बच्चा हमारे पास आया, बोला कि प्रसाद चाहते हो? हमने हाथ बढ़ाये! उसने कहा कि उसकी सखी को आईफोन की तलब है! अगर सखी मिल गई तो पास-क्रिया बेमतलब है। हमने सोचा कि प्रसाद का असर देखा जाए, अगर इसका कुछ असर है तो संस्कार या अंधविश्वास, एक न एक पर तो जरूर अच्छी खबर है। हमने उसे अपना आईफोन देकर चलता किया और कागज में लिपटे प्रसाद को जेब में डाल लिया। अब सामने फिर से कतार है, आशाएँ हैं, तनाव है, सागर अपार है।
लाठीदार चिल्ला उठे, रोक उसे! एक बड़ा अयोग्य सा दिखने वाला लड़का खड़ा हो गया। तलाशी शुरू हुई…पजामा! …पजामा के पीछे क्या है? पजामा कतरा कतरा होकर कतरीना हो गया… शर्ट…अब सब बेपर्द! अपन ने कैमरामैन से कहा, क्लोज अप लो! ‘भैया जी!’ हमने खिसियाकर कहा, लैब में देखा जाएगा!…इतने में शोर मच गया…
अरे! होल! कान के होल में गंडगोल…हमारे कैमरामैन ने अंदर झांकने की कोशिश की और तब तक छेद सील हो गया था…अगला होल, नाक का होल! छिह! गंदी नाक! लंबे बाल! टॉर्च मारने वाले ने ओकी कर दी! वो बेहोश है…आस पास नाक के बाल पड़े हैं! उसे स्ट्रेचर पर ले जाया जा रहा है। दूसरे जन ने टॉर्च पकड़ी अब। परीक्षार्थी के नाक में लम्बे बाल पाये गये हैं। उन्हें काटने की प्रक्रिया चल रही है…इतने में लाठियां बजने की आवाज आई! …गिल्ली डंडा!
कैमरामैन बोला, ‘सर! एक लड़का गुल्ली डंडा लेकर अंदर घुसने की कोशिश कर रहा है!’ हम उधर भगे! लड़का अड़कर खड़ा है। लोग लानतें दे रहे हैं, ‘अंदर खेलने जा रहा?’ कुछ लोग उसपर झपटे! गुल्ली डंडा खोलकर परीक्षार्थी के साथ आए गार्जियन को पकड़ाने की बात कही जा ही रही थी कि अचानक एक और चीत्कार हुआ। एक छोटे से मुंह वाला गंदला थैला भी पाया गया है परीक्षार्थी के पास…चीट छुपाने की काफी जगह है! यहाँ तक कि कैलकुलेटर और मोबाइल एक साथ रखा जा सकता है!
अधिकारी बोले! इसको अनुमति नहीं मिलेगी प्रवेश की!
‘सर! ज्यादा टाईट हो रहा है!’, एक सज्जन बोले, ‘ आम तौर पर गुल्ली डंडे और वो वाला झोला कॉमन चीज है! बांकी बिना सिले एक वस्त्र का आईडिया खुद इतना बेहतरीन है कि लड़के चोरी क्या करेंगे, खुद से नजर चुराने लगेंगे!’
बदन पर एक सूत नहीं चाहिए, सिर्फ स्टीकर और सील काफी है। ये MMMET के अनुशासन की झांकी है…ये कदाचार के अभ्यासी लड़के अभी अपनी विफलता पर रो ही रहे थे कि तभी एक होनहार काले टेंट्स की कतार के बीच से उदित हुआ। जनमानस पूरा चकित हुआ। प्रशासन सारा चमत्कृत हुआ।
होनहार ने हाथ में पकड़ा ठोंगा मुख में पलटाया, गटगटाकर प्रसाद, ठोंगा सहित चबाया और निगल गया…सारे कपड़े उतारे और जरूरत भर की जगह पर, ‘भिक्षा नहीं शिक्षा’, का स्टीकर लगाकर चिल्लाया,’ जो पाठ न रहे हमको याद, उसे भी याद कराए, मलखान जी का प्रसाद!…बोलो! याद याद तेरी याद याद…’
अधिकारी जी के विभिन्न आँखों से आँसू निकल आए! ये है मूर्ख देश का भविष्य! तभी यहाँ गांवों में घर पर ताले और भीतरी गेट पर प्रहरी विथ भाले, लगाने की जरूरत या चलन नहीं रहा, मूर्ख रहा हो पर अपना युवा कभी बदचलन नहीं रहा!
…अब जब सारी कतार अंदर घुस चुकी है तो बाहर, कटी हुई सूत, पैंट की चेन, नाक के बाल, छोटी मुँह वाली थैली में रखा माल, कमीज, जूते, कतरी हुई चूल और हवा में बलखाते तंबू, बरसती हुई धूप और लू से सांय सांय करते बंसबिट्टी के बम्बू रह गए!
अपन और कैमरामैन ने खाना खाया और अचानक जेब में पड़े प्रसाद पर हाथ गया। हमने प्रसाद बांटकर खा लिये और जब ठोंगा फेंकने को हुए…
‘सर बड़ा महंगा ठोंगा होगा! प्रसाद तो पचास रुपये का भी न होगा!’
हमने ठोंगा जेब में वापस रख लिया। घर जाते हुए, आधी आधी बाँट लेंगे और फ्रेम करवाकर माला चढ़ाएंगे…
बच्चों के प्रश्नपत्र की फोटो लेकर लौट जाएंगे! मुझे अपना बचपन याद आ गया, प्रसाद में कुछ ऐसी पावर थी कि जागते जागते आँखों में MMMET का कैंपस आबाद हो गया! कहाँ ये रिपोर्ट लेकर टर्र टर्र करते फिरते हैं! साला पूरा जिंदगी बर्बाद हो गया!
