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दीदी के प्रवास पर C.E.O साब के विचार!

मैं सभी चमचों के विचार नीचे चेंप रहा हूँ। जिन्हें गालियाँ या तालियाँ देनी हैं, उन्हें डायरेक्ट दिया करें। बताते चलें कि हमारे पड़ोस में एक दीदी जी का असामयिक एंटार्कटिक लोकगमन हुआ है, इसलिए शोकाकुल हमारा केसरिया चमन हुआ है। सभी कलमकार विथ उनके एग्जेक्ट विचार, नीचे विस्तार से हैं।

जहाँ तक मेरा विचार है, मेरा विचार है कि विचार छोड़ो और अपना काम करो। विचार-फिचार से कुछ होता जाता नहीं, जिसकी जब बारी आएगी, जाएगा, दूसरों को भी ले जाएगा। जब तक यहाँ हो, रोटी दाल का इंतजाम कर लो! गंगा बह रही है, गंगाजल चढ़ाकर अपने विधाताओं को प्रणाम कर लो! ये फसल कट चुकी है, हाट उठ चुकी है। डेरा-डंडा उठाओ और घर जाओ, कल फिर कमाना है।

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