पुरानी कहानी थी, एक लकड़हारे की। बड़ा ईमानदार आदमी था, उसने कुल्हाड़ा नहीं बदला था। पुराने युग की बात थी, अब नया समय है। प्लस कॉपीराइट वाला विषय भी हो सकता है अतः हमने एक नई मोटावेषण वाली कथा लिखी।
एक बार की बात है, एक शहर में, एक भिखारी रहता था, भीखू। उसके पास भीख का एक पचका कटोरा था, साला कभी कभी तो उससे सिक्का भी चू जाता था। अगल बगल के भिखारियों और भिखारी समाज ने कहा कि कटोरा बदल ले। सिक्का हो तो हो, खाने वक्त दाल भात भी चू जाता है। इतना भीख जमा कर चुका है, एक कटोरा तो खरीद ही सकता है, लक्ष्मी तो उसी से है। कमाई का जरिया तो दुरुस्त होना चाहिए, सारे सुख उसी से हैं।
बंबई फिल्मिस्तान कंपनी वालों ने सोचा कि एक मीडिया इवेंट किया जाए, थोड़ा कांटेंट मिलेगा, थोड़ी पब्लिसिटी! सोने का एक कटोरा खरीदा गया। एक हिडेन कैमरा लगाया गया, एक इंसान को सहृदय दिखने का मेकअप लगाकर भीखू के पास भेजा गया।
भीखू, तुम वो पिचका कटोरा फेंककर सोने का कटोरा ले लो।
भीखू ने कलेंडर देखा… आज एक अप्रैल है, आज तो मूर्ख दिवस है। भीखू ने कहानी भी पढ़ी थी,
भीखू ने कहा, का करेंगे एकर?
आयें?
एकरा में भीख माँगे?
सोने का कटोरा में भीख? गुदा के अंदर तक भिखारीपना घुस गया है? अपना भिखारपना, गुफा से निकालकर हग दो! ई रखो!
भिखारी अपने आप में सिमट गया, नाह!
अरे रखो! आगे भीख नहीं मांगना पड़ेगा?
काहे नहीं? कटोरा खायेंगे? पियेंगे? पहनेंगे? कटोरा के तरे रहेंगे?
अरे सोना है महराज! सोने का कटोरा! तुम इसको बेच दो, सब मिल जाएगा!
फिर कमाएगा कैसे? बेचकर खाना पड़ेगा? बेचकर खाने का आदत लग गया तो एक दिन गुर्दा भी बेचकर खा जाएगा अपन? बेचकर कोई जिया है साब?
तुम इससे पांच सौ कटोरा ले सकेगा? एक कटोरा रखे रखना! सब बिक जाए तो फिर कटोरा लेकर बैठ जाना।
नाह! भीख माँगे का आदत छूट जाएगा! एक सप्ताह भी गायब रहा तो ये बोरा बिछाने का जगह कोई हथिया लेगा… ई बहुत अच्छा जगह है! दूर से नजर आता है, लाइन में तेरह नंबर का भिखारी, शुभ जगह है। आधे दिन में ही पूरे दिन का प्रबंध हो जाता है। वास्तु बहुत बढ़िया है, बोरा बिछाकर भीख मांगने के बीच… ई देखिये! पीछे लॉकर भी है! बीवी से छिपाकर कुछ पैसा यहां भी रख लेते हैं, ससुरी घर ले गया पैसा, छिरिया देती है। बगल में सुलभ पाखाना भी पास ही है, आधा दिन के बाद सूरज घूमता है तो छाया भी है। थोड़ा इस जगह से मोह माया भी है। एही जगह से जिंदगी शुरू किए थे…एक सोना का कटोरा लुट लेगा हमको!
ठीक है। तुम सोना का कटोरा में भीख मांगो। लोग बोलेगा कि हाईफाई भिखारी है! रात में दूर से नजर आ जाएगा, चमकते कटोरे वाला भिखारी ड्यूटी पर बैठा है, लोग आयेगा और भीख दे जाएगा।
भीखू ने कहा, देश गरीब लोगों का है, सोना अमीरी है। गरीब लोग आकर परेशान करेगा कि सोना का कटोरा देखने दो, चाटने दो…काम नहीं कर पाएगा हम। रात बेरात, चोर डाकू आयेगा, कस्टमर तो आएगा नहीं, कटोरा ले जाएगा, ऊपर से छह इंच छोटा करेगा सो अलग! कटोरा तो कटोरा, जान से भी जाएगा!
उद्दंड और मूर्ख भिखारी है साला! अरे, तुम दोनों कटोरा में माँग लो न बे!
नाह, भिखारी समाज में नियम है कि जितना बिछावे के बोरा, उतना ही कटोरा।
नीचे से ले लो! तरे तरे, घर आंगन भरे। वेतन त पेटो न भरे।
देखह भाई! गैरकानूनी काम न! कटोरा में कटोरा रख दे! न तो कटोरा भंजा ले और खुदरा भीख, हई पिचकल कटोरा में धरे। हम कटोरा न देम!
अब इमोशनल होना भी जरूरी है, ई कटोरा हमार शान है, पहचान है, ईमान है, भगवान है, सम्मान है, इसी से सुख आऊ शांति आऊ सम्मान है। यही कटोरा से हमर जान और जहान है, ई कटोरा हमर तकदीर है, हम आत्माभिमानी फकीर हैं। ई बोरा हमर माई है, ई भिखारी कॉलोनी हमारा समाज है, ई बदहाली हमर सरताज है, कल कोई नहीं देखा पर ई भिखारीगर्दी से ही हमर आज है! एकरा हमरा नाज है! हमर आवाज, भिखारियन बिरादरी के आवाज है। … मेरी आवाज ही मेरी पहचान है….
अरे तोरी के! सब भिखारी खड़े हो गए! भीखू जिंदाबाद के नारे लगे।
जब तक सूरज चांद रहेगा, भीखू नंगी गान्ड रहेगा!
बैठ ससुर! हल्ला करता है साला! हम भिखारी हैं कि नेता और कारोबारी हैं? काम से काम रखो!
कैमरा, कटोरा, सब लेकर, साहब लोग भग लिए। इधर भीखू की डपट के बाद भीखकर्मी अपने काम में वापस लग गए। क्या कमाल का भिखारी है भीखू! जियो भीखू!
भीखू खुद को गरियाता हुआ, वापस बोरी ठीक से बिछाकर बैठ गया! एक त एक अप्रैल, ऊपर से सनीचर! साला, ग्रह, गोचर, साढ़े साती, अढैया, सांप योग, नेवला योग, कुत्ता मुतल भाग्य भोग, कश्मीर से कन्याकुमारी तक रोग ही रोग, ओकरा पर तैंतीस करोड़ देवता लोगों का प्रकोप! एक त भीख माँगकर कैद काट रहे हैं, उसमें भी लोग छीलल बाँस ठेलने पहुँच गया! साला, मनोरंजन चाहिए त हमको शेर के आगे ठेल दो, शेर पेलेगा तो वीडियो ले लेना… न तो चौराहा पर नंगा टांगकर तोप से उड़ा दो! … ओकरो से न हो संतोष तो गिद्ध से नुचवा दो, तलवार घुसा दो, बोटी बोटी करा दो!
भीख मांगते मांगते दिन तो कट जाता है! … भीखू ने सामने देखा तो एक टाई वाला जूता बजाते हुए गुजरता नजर आया…
देगा धर्मी, देगा दान, दया मया में करिह दान!
टाई वाले ने झिड़कते हुए कहा, हट साला, भिखमंगा! सलामत है…भीख मांगता है झोपड़ी वाला!
भीखू ने तौला! हाँ! कुंभीपाक नरक का कैंडिडेट है!
– टाई जाई कढ़ाई में! छोलनी से प्यार की लड़ाई में! खर्च बेकार है सिलाई में! कह दिए भलाई में!
का बोला बे?
भीखू ने कटोरा बजाया, देगा धर्मी…
