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केसरिया भारत: राष्ट्रीयता के पक्के रंगकेसरिया भारत: राष्ट्रीयता के पक्के रंग

बकील साब

हम सबकी वकालत करते हैं, इसलिए हमारा नाम वकील पड़ा, कुर्सी पर बैठे हैं, इसलिए खड़े लोग हमें साहब बोलते हैं। देखिए, विरली चीज ही ऊपर जाती है, ऊपर जाना एक गुण तो होगा ही! आप भी बोलते हैं, हम भी, लेकिन ये जीभ का करतब है। बालक में बाल देखना, रुमाल में रूह देखना और फिर बालक के रूमाल को रूह के बाल के सापेक्ष रखने पर बालक की रूह और रुमाल में लिपटे बाल खोज लेना राष्ट्रीय टैलेंट है। इसी टैलेंट से साहब कहलाते हैं।

चर्चा में

अब चूंकि हमारे भीतर साइंटिफिक टेंपर ज्यादा था...कहिए कि कक्षा नौ और दस की जीवविज्ञान की किताब पढ़नी पड़ी तब हमें ज्ञान हुआ कि...

प्याज के छिलके

भारत में जिस तरह ताबड़तोड़ भविष्य रोपे गए हैं, तो भविष्य फलेंगे भी फूलेंगे भी! और इन्हें फलित करना हम सबकी जिम्मेदारी है! जब...

प्रस्तुति एवं COPYRIGHT © 2022 MRITYUNJAY MISHRA