हम सबकी वकालत करते हैं, इसलिए हमारा नाम वकील पड़ा, कुर्सी पर बैठे हैं, इसलिए खड़े लोग हमें साहब बोलते हैं। देखिए, विरली चीज ही ऊपर जाती है, ऊपर जाना एक गुण तो होगा ही! आप भी बोलते हैं, हम भी, लेकिन ये जीभ का करतब है। बालक में बाल देखना, रुमाल में रूह देखना और फिर बालक के रूमाल को रूह के बाल के सापेक्ष रखने पर बालक की रूह और रुमाल में लिपटे बाल खोज लेना राष्ट्रीय टैलेंट है। इसी टैलेंट से साहब कहलाते हैं।