अब क्या ही बोलूँ मैं! देर शाम होते – होते मौसम बड़ी जोर से खराब हो गया! जी घबराने लगा! क्या कहूँ कि क्या होने लगा! अंदर आ रहे हवा के झोंके से मेरी जुल्फ उड़ गई, न जाने कैसे मेरी उंगलियां फिसल गईं। लोकेशन कहीं की सलेक्ट करनी थी और मुई कहीं और की सलेक्ट हो गई। गाड़ी वाले ने ओटीपी मांगी, मैने दी। गाड़ी चल पड़ी।
अब मुझे लगा कि जाना तो कहीं और था, ये गाड़ी वाले भैया किधर घुसे जा रहे हैं, फिर लगा कि हो सकता है सरकार ने नई रोड बनाई हो, निकलते हुए घर निकल जाएंगे! अरे! मै तो कहीं और पहुंच गई!
” ये किसका घर है?” मेरे पूछने पर गाड़ी वाले भैया बोले, “आप जानो!” मैने कहा कि पैसे ले लो भैया पर घर किसका है ये तो बताते जाओ। वो भैया बोले कि मैं घर वाले से ही पूछ लूँ! मुझे भी आईडिया ठीक लगा, मैने दरवाजा खटखटाया, “कोई है…अरे भैया कोई है!”
एक भैया ने दरवाजा खोला, बोले कि वो हैं! वो बोले कि उन्हें मालूम था कि मैने गाड़ी वाले को गलत लोकेशन दे दिया है, वो तभी तो सुबह से मेरा इंतजार कर रहे थे! फिर वो मुझे अंदर ले आए। कुशल – क्षेम पूछी। उनके यहाँ कामवाली आई थी, उन्होंने उनसे ग्रीन टी मंगवाई। फिर नाश्ते को पूछा। मैने कहा कि ” नहीं, मुझे फिर से गाड़ी करनी है, घर जाना है।” भैया बोले कि गाड़ी रात में तीन बजे तक मिलेगी, मै चिंता न करूं। होगा तो वो खुद की गाड़ी से मुझे घर पहुँचा देंगे।
मैं बहुत थक गई थी, भैया ने कहा कि मेहमान खाने की बेर में आएं तो खाना नहीं खिलाने से पाप लगेगा। भैया को पाप न लगे इसलिए हमने डेढ़ किलो मुर्गे तोड़ डाले, बेवरेज भी थे, डेजर्ट भी था। भैया बोले कि खाने के बाद अन्न को थोड़ा समय देना चाहिए।
क्या ही कहूँ, भैया बहुत गरीब थे, एक ही बेड था उनके यहां तो! हालांकि सेवन सीटर गाड़ी थी पर शायद पड़ोसी की हो, यहाँ लगा गए हों। अब मैं कैसे उनका दिल दुखाती, सो मै खुशी – खुशी उनके बेड पर फैल गई। बहुत थकावट थी।
मुझे बड़ा खराब लगा कि मैं भैया के बिस्तर पर और भैया बाहर प्लास्टिक की कुर्सी पर…मैने पुकारा, “भैया!…” भैया आए। उनको लगा कि मुझे कोई दिक्कत हुई। उन्होंने पूछा, “क्या हुआ बहन!”
पता नहीं कैसे मेरा हाथ, मेरे पैर पर चला गया। भैया ने एक मिनट भी देर नहीं की और तुरंत काम-वाली को बुलाया। काम वाली ने फिर पौना घंटा मेरे पैरों की मरम्मत की और भैया ने उसे पांच सौ रुपए upi करके भेज दिया। तब मैने भैया से कहा कि अब मुझे घर जाना चाहिए। भैया ने जैसे ही गाड़ी की चाभी निकाली, बाहर जोर से बिजली कड़की..मै कंबल पकड़कर रोने लगी। फिर भैया ने मुझे बहलाने के लिए बात करना शुरू किया।
उन्होंने बताया कि उनका गाँव कहाँ पड़ता है, उनके घर में चार भैंसे हैं, हर भैंस के तीन पाड़े हैं। इतना दूध, इतना दही…
मैंने भी बताया कि मेरे घर के पीछे किचन गार्डन है, उसमें बैंगन, भिंडी, लौकी जैसी सब्जियां आती हैं।
उन्होंने बताया कि उनको इंग्लिश लिटरेचर में सौ में निन्यानबे दशमलव छह छह प्रतिशत नंबर आए थे, रसायनशास्त्र में वो मात्र उन्हतर नंबर ही ला पाए। अरे! ये तो उलट था, मैने बताया कि मुझे रसायनशास्त्र में सौ में छियानवे नंबर आए थे, अंग्रेजी में मुझे छियासठ दशमलव नौ नौ नंबर आए थे। उन्होंने वादा किया कि वो मुझे इंग्लिश और मैने वादा किया कि मैं उन्हें केमेस्ट्री पढ़ाऊंगी। फिर हमने दे ताली जैसे की कि भैया के हाथ से गाड़ी की चाबी छुटकर खिड़की के बाहर गिर गई।
“ओह!” भैया तो मानो डिप्रेस्ड हो गए, “सुबह ही खुलेगा उधर का रास्ता…पड़ोसी की गेट बंद है और रात के डेढ़ बज रहे हैं!” भैया तो बस रो ही देते। मैने उन्हें सहारा दिया, उनके आंसू पोछे, “मै कल चली जाऊंगी।” फिर भैया ठीक हुए और मुझे गुड नाईट बोलकर जाने लगे…मुझे खराब सा लगा! मैने कहा कि घर उनका है, वो गरीब हैं, वो रात में प्लास्टिक की कुर्सी पर रहें ये ठीक नहीं।
फिर भैया ने ही कहा कि ठीक है, कुछ प्रबंध करते हैं। मैने कहा कि मेरे पास एक उपाय है, बाई द वे भैया और मै, हम दोनों इतने पढ़े लिखे जो हैं! फिर भैया दो ग्लास दूध ले आए। उन्होंने बताया कि मांजी, मतलब भैया की मम्मी कहती थी कि सोने से पहले बच्चों का दूध पीना जरूरी है वरना रात में उनके शरीर से, एक चिड़िया भर का मांस सूख जाता है। हमने अपना अपना दूध पीकर ग्लास रख दिया।
सुबह मैं ऑटो करके घर पहुँची तो पाया मेरे बेटर हॉफ ऑफिस जाने को तैयार हैं। मैंने उससे कल वाली बातें कही तो वो अफसोस करने लगे! ” बताओ! अब तैयार होकर ऑफिस जाते हुए तुम्हारे एग्यारह बजेंगे! बॉस तुम्हे बहुत बुरी तरह तोड़ेंगे।”
मैने पूछा, “…तो क्या करती?”
“वहीं से ऑफिस कर लेना था!”, वो घर से निकल गया।
“मेले बाबू ने थाना थाया!”, मै पूछती हुई पीछे आई।
“थाना नहीं जाना, झालमूढ़ी खाई! अभी ऑफिस के आगे बड़ा पाव खा लूंगा! सस्ता है और गरिष्ठ भी।”
मेरी आँखों में खुशी के आसूं आ गए! ये है अंडरस्टैंडिंग, सपोर्ट और सच्चा साथ। इसी दिन के लिए तो मैंने मैरेज, वो भी लव वाली, की थी!

















