श्री हर्ष रंजन जी की बहुचर्चित पुस्तक ‘लड़की हूँ! लड़ती हूँ!’
लड़कियाँ इसलिए लड़ती हैं कि वो लड़की हैं, या वो लड़की हैं, इसलिए लड़ती हैं या वो लड़की तो हैं पर लड़ती नहीं हैं। हर कोई जो लड़े वो लड़की नहीं, हर लड़की लड़ती चले ये भी शास्त्रोक्त नहीं। लड़की और लड़ने के भावों को तलाशते श्री हर्ष रंजन को एक बार और बधाई।
यह किताब तब तो आपके लिए और भी जरूरी है यदि कोई लड़की आपसे लड़ती है, या कोई जो आपसे लड़ रहा है, आप जानना चाहते हैं कि उसके पीछे कोई लड़की तो नहीं, जो समय-समय उससे भी लड़ती या उसे लड़ने को प्रेरित करती कि नहीं।
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