२०४७ का मूर्ख देश! सामने सापिंग माल! भीड़म भीड़ है। आज छुट्टी है! सुई से लेकर तलवार, राई से लेकर पहाड़ और अनार से लेकर बीमार सबके सौदे आज होने हैं, अगला सप्ताह छह दिन दूर है और चौबीस घंटे के दिन में साँसें कम और ग्रोथ भरपूर है।
-यस सर!- शॉप पर बैठी दीदी ने पूछा।
-एक थाली!
दीदी ने पूछा – कौन सी? खड़ी या पड़ी?
-माने?- चाचा सोच में पड़ गए। पीछे धक्का-मुक्की चल रही है।
-ए चाचा! लंबा लाइन है, जल्दी करिए!
-सोचे ल दे बचवा!
-साइड धर के सोचिये न चाचा! …देर लगा रहे हैं, अभी हमनी के और सामान लेना है, आटा चावल, सर्फ, शैंपू, प्रोटेक्शन बहुत कुछ!
चाचा कुछ बोल पाते कि इससे पहले एक कड़क मूँछ वाले भैया ने उन्हें परे ठेल दिया – ई उमीर में थाली खावे के शौक चढ़ल है! बुढ़ऊ न त!
-ए बचवा! दू हजार पच्चीस में हमर मेहरिया भाग न जाती तो आज तुम्हार उमीर के लइकन होता।
-भग ले कि न भगले! भूखियाएल हैं ना, सब भूख छोड़ा देबऊ!
-प्लीज़ मेंटेन साइलेंस! प्लीज़ कतार में रहें! वरना मैं काउंटर बंद कर दूँगी!
चाचा साइड हुए।
-वन बेबी!.. सॉरी बेबा!
-नॉट अलाउड सर! अगेंस्ट गवर्नमेंट गाइडलाइंस, नॉट अलाउड बाय आवर कॉर्पोरेट पॉलिसीज एंड बिजनेस एथिक्स!
-हम मैनेज कर लेंगे!
दीदी ने फॉर्म दिया – प्लीज़! ये एग्रीमेंट फॉर्म है, इंडिमिनटी बॉन्ड, आईटीआर रिटर्न, एड्रेस प्रूफ, आईडी प्रूफ एंड अदर डॉक्युमेंट्स, विथ कॉम्प्रिहेंसिव गाइडलाइंस, टर्म एंड कंडीशन! सब लेकर शॉप नंबर १३ में जाइए। आगे वो गाइड करेंगे! इट मे बी टाइम कंज्यूमिंग, लेंथी एंड एक्सपेंसिव प्रोसेस, सो कीप मनी, टाइम एंड पैसेंस! थैंक्स फॉर सबक्राइबिंग ए बेबी विथ अस! वी आर थैंकफूल टू यू फॉर सिलेक्टिंग आवर प्यार वाले सर्विसेज टू प्रोवाइड एंड सर्व यू ए यूनीक बेबी वाट यू ड्रीम अबाउट।
-करना क्या-क्या पड़ेगा? पाले पड़ेगा का?…
-गोदभराई से लेकर चिता दहन! सब इवेंट्स कवर करेंगे! अनलिमिटेड यादें, मतलब फोटो वीडियो शूट्स। महीने में दो संडे सब्सक्राइबर विजिट, इसके बाद पर पेड अनलिमिटेड विजिट बट इन कंट्रोल्ड एनवायरनमेंट!
-अगर चिता जलावे नहीं पहुंचा तो!
-इंपोसिबल सर! वो फाइनल विज़िट होगी, हमारे लिए भी कंपलसरी है, क्योंकि चिता की फोटो के साथ एग्रीमेंट टर्मिनेट होता है। अगर हमारा प्रोडक्ट…मतलब योर बेबी, न पहुंचा तो इसमें हमारा ही नुकसान है। फिर भी, वी विल मेंशन इट इन एग्रीमेंट! हम आपकी सारी इन्वेस्टमेंट और पेमेंट ऑन दिस पार्टिकुलर प्रोजेक्ट वापस करेंगे, विथ इंटरेस्ट जो एक टर्म डिपॉजिट पर मिलती है। पेपर, पेमेंट रिसिप्ट सम्भाल कर रखियेगा।
-कौन काउंटर?
-१३ नंबर शॉप!
-बुढ़वा! भत तोरी के!- साब ने जाते हुए चाचा को फिर दुत्कारा।
-काउंटर अलग कीजिए मेम, इन सर्विसेज के लिए! एक कस्टमर को इतनी देर से इंटरटेन कर रही हैं आप! हम लोग क्या बेकार में खड़ी हैं! – एक दीदी फसाद करने पर उतारू हैं – इतनी गर्मी में इतनी लंबी लाइन!
-वी आर एक्ट्रीमली सॉरी मैडम! वी आर इन प्रोसेस टू आइडेंटिफाई कॉजेज ऑफ डिले एंड फाइंड सॉल्यूशंस टू मिनिमाइज वेटिंग टाइम! थैंक्स फॉर योर वैल्यूएबल फीडबैक! प्लीज़ बी पेसेंट! वी आर क्लियरिंग द क्यू एज सून एज पॉसिबल!
चाचा के पल्ले कुछ पड़ा नहीं। वो सामने खड़े लड़के को देखने लगे!
-वन!… – लड़के ने धीरे से कहा!
-बोलिए सर! – दीदी ने कान लगाया?
लड़का शर्मा रहा है।
-कह रहा है, प्यार का थाला चाहिए! – चाचा ने संभवतः सुना है।
लड़के ने सर हिलाकर कन्फर्म किया।
-बोलिए सर!
लड़के ने फिर कुछ कहा।
-बोलह न मरदे! – चाचा ने भाषांतरित किया – माइडेम जी, कहता है कि गाय है, इकर घरवा में होतईं! गाय के का करेगा बुआ! अकेले खा, घरे पहुँचाबे के दाम बढ़ जाता है। गाय के कुछ और खिला दिहअ! आऊ ई बोल कि थाला का खैबे? थाली खो मर्दे!
-ए चाचा! करबह बकालत! बनबह बकील! हटबह कि न अपन ऑर्डर दे के!
चाचा जी बुदबुदाते हुए हट गए!
-का बाबा! काहे के गुदाल है!
-बचवा! हमारी मेहरारू बोली कि अब कंसेंट का बात है। भूत अभिशाप, वर्तमान प्रलाप,भविष्य सन्निपात है। कह के भग गईं। दूसर बियाह की। दो महीना बाद दूसर पति कहीं और सेट हो लिया। अब एकरा तीसर ब्याह करना पड़ा…फिर कंसेंट अड़ा, ब्याह मुंह के बल गिरा! अब इतना ब्याह होने के बाद जवानी, जजमानी, जमा पूंजी सब का खर्चा इतना हो गया कि बस काम खत्म!
-त चाची गई कहाँ?
-मूर्खदेश में योजना आई, चतुर परजीवी योजना! उसी की पेंशन पर गुजरा हो रहा था, फिर सुने कि गंगायात्रा पर निकल गई। ये २०४० की बात है। अब ई ठो कानून आ गया!
-लाइन में लगे बिना ऑर्डर कर द बाबा! एकर एप्प त हइये है। सब डिश देख लिहअ, मेनू पढ़ लिहअ!
-तनी डाउनलोड करवा द बेटा! तनी-मनी स्नेक भी मिल जाए त काम हो जाए! – चाचा ने अपना मोबाइल बढ़ाया।
-भर दम तू खा पैबह बाबा!- लड़के ने मोबाइल पकड़ा- बूढ़ा न त बूढ़#@&… बुढ़ारी में हई हाल है त का होवल होतई, जब होवह हट्टा-कट्ठा!





















