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फेयरवेल इन वेल 6/N

दीदी के प्रवास पर पासार्थी के विचार!

दीदी के प्रवास पर पासार्थी के विचार!

एक और दीदी चली गई! हमारे टाइम आते आते एक भी बचेगी कि सब को अंटार्कटिका ही भेजकर मानेंगे ये अड़ियल लोग! दीदी की बटन जैसी आँखें, मेंढक जैसा चेहरा, झोपड़ी जैसे बाल, कपड़े जैसे रुमाल! मुझे तो रोज सपने आ रहे हैं… भर देते बिल! राशन कम कर लेते न! इतनी अच्छी दीदी को बिना किसी मतलब…अब किसी को क्या फायदा मिलेगा बताओ?

हमारे स्कूल में भी बहुत सी दीदियां हैं…भगवान! मै जल्दी बड़ा क्यों नहीं होता! जल्दी पास होकर नौकरी लग जाए…तब तक चाहे जैसी भी हो, कोई तो एक दीदी बचब जाए! मैं गांधी मैदान में घर बना लूंगा…बगल में विंड मिल ही चलवा लूंगा! बिजली न हो तो फूँक फूँक कर हवा करूंगा! अलग हाई टेंशन तार, अलग ट्रांसफार्मर और अलग पावर ग्रिड के लिए एप्लाई करवाऊंगा! भगवान मुझे इतनी सैलरी दे कि ये सब जिम्मेदारी पूरी कर पाऊं! एक दीदी सी काफी है जिंदगी में पर सारी दीदियों के लिए एक उम्मीद जगाऊं!

दीदी आप अंटार्कटिक में देखना, वहाँ पंखे ही पंखे हैं! वहाँ उल्टे आपको कहीं ठंड न लग जाए!

वो तो पिता जी टिकट कटवाकर नहीं देंगे…उल्टा मारेंगे सो अलग! …वरना कंबल पहुंचा आता!

आह! भगवान जल्दी नौकरी लग जाए! खुद मालिक बन जाऊंगा तो अंटार्कटिक क्या प्लूटो तक बिना किसी से पूछे जा पाऊंगा।

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