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केसरिया भारत: राष्ट्रीयता के पक्के रंगकेसरिया भारत: राष्ट्रीयता के पक्के रंग

बवाल

जॉब सिक्योरिटी

आत्माराम कंपनी की सीईओ तैश में खड़ी हुईं, ‘ये घर बैठे चार-चार कंपनी से पेंशन पा रही है…और हम मूर्ख हैं कि नई भर्ती करें!’
‘आप कंपनी बंद कर लो! सरकार खुद योजना बना रही है इस क्षेत्र में उतरने की, अगर टैलेंट हो तो अपना भी प्रबंध कर लो!’

मतलब, हद होती है साहब! कहते हैं कि सिक्योरिटी चाहिए, फिर कहते हैं कि सुपीरियर हैं सुपीरियरिटी चाहिए, बांकी इन्फेरियर हैं, इन्फेरियरिटी हटाइये! मतलब…ऐसे इंसाफ होता है!

हमारे पड़ोस में एक कंपनी चलती है, आत्माराम एंड संस! उन्होंने टिंकी जी की भर्ती ली, होममेकर के पोस्ट पर! अच्छी खासी सैलरी थी, दुनिया भर के भत्ते, लत्ते, फर्नीचर से सिलबट्टे, सब मिले। टीम लीडर से भी प्यारा रिश्ता था…साथ खाना, साथ पीना, साथ मरना, साथ जीना! लेकिन फिर दिक्कत शुरू हुई!

टिंकी ने परमोशन के लिए एप्लाई किया पर पर्याप्त टैलेंट नहीं सप्लाई किया, नतीजा छह साल प्रमोट नहीं हुईं। टीम लीडर अब और ऊपर चले गए और टिंकी जी अगले प्रोजेक्ट के लिए अहर्ता नहीं जुटा पाईं! बहरहाल कंपनी के उच्च प्रबंधन से प्रेमपत्र आने लगे। नौकरी दुश्वार होती गई। इसपर तकरार हुई, तू तू मैं मैं हुई, जूतम पैजार हुई। कंपीटेंसी पर सवाल हुए, नई भर्ती पर मंथन शुरू हुआ, टिंकी की पुरानी फाइलें निकली, जांचकर्ता बहाल हुए।

टिंकी पंचायत पहुँच गईं। अर्जी लगाई कि टीमलीडर ने उनसे अमानवीयता और अप्राकृतिक ढंग से काम लिया है, उनको घर जाने की छुट्टियां नहीं दी जाती थी, वर्क लाइफ बेलेंस नहीं था, एप्रिसिएशन नहीं मिलती थी, ऐसा थैंक लेस काम वो करती रहीं। उच्च प्रबंधन उनसे अनुचित मांगे करता था, उन्हें जबरदस्ती कंपनी में निवेश करवाया गया और सबसे बढ़कर ये कि, उनके नौकरी में रहते हुए भी गैर लोगों को उनके चैंबर में प्रवेश करवाया गया। टिंकी ने बताया कि कंपनी उनपर प्रतिस्पर्धी कंपनियों के लिए जासूसी का आरोप भी लगाती है और तो और अगर वो शेयर बाजार में पैसा लगाये तो भी आय से अधिक संपत्ति का मामला दाखिल कराती है! क्या वो गुलाम है!

आत्माराम कंपनी ने कहा कि वो अब किसी भी हाल में इस इम्प को नहीं रखेगी। मामला संगीन हो गया। कंपनी ने कहा कि उनका समय इस नकारे इम्प के लिए और टिंकी ने कहा कि उसकी जवानी इस खूनखोर कंपनी के लिए बर्बाद हुई।

अब मूर्खदेश के श्रम कानून पृष्ठभूमि में आए। टिंकी बर्खास्त! कंपनी को नई भर्ती करने का अधिकार। प्रबंधन और बांकी लोगों पर लगे आरोप गलत साबित हुए… पंचों ने जैसे ही निर्णय पर हस्ताक्षर के लिए कलम उठाया…

भूकंप आ गया…ज्वालामुखी फट गया…सुनामी आ गई…मंगल धरती से टकरा गया…सूर्य फ्यूज हो गया…नील गगन फट गया और आकाशवाणी हुई,’ ये कैसा न्याय! एक निःसहाय! अबला, अब कहाँ जाये!’

…तुरंत एक रोशनी हुई! ए फैसला लिखने वाले, तू मूर्ख देश की नौकरी करता है! सोच! अगर कभी मूर्ख मंत्री तुझे नौकरी से निकाल दें तो क्या होगा तेरी बूढ़ी माँ और मरे हुए बाप का! क्या होगा तेरी अबला, जवाँ बीबी और उसके बच्चों का, जो तुझे पापा कह लेते हैं! क्या तू दर दर नहीं भटकेगा? क्या तेरे पैंट की फटी जेब से तेरा दिल नहीं लटकेगा? तू कहाँ जाएगा सावन की बारिश में,  जेठ की तपिश में, जाड़े की रात में, सब्जी क्या खाएगा दाल भात में! सोच और फिर बोल! क्या तू जॉब सिक्योरिटी नहीं चाहता! क्या तू पेंशन नहीं मांगेगा? एनपीएस भी मिल गई वरना बुढ़ापे में क्या विष्ठा छानेगा? हाँ! बेबस है टिंकी, जिसने करियर का हिस्सा आत्माराम की सीढ़ी पर गुजार दिया! मूर्ख देश तो भरतार है तेरा पर  सोच उसका क्या जिन्होंने अपना टैलेंट, एनर्जी और सिनर्जी आत्माराम कंपनी पर वार दिया! तू तरकारी इम्प नहीं एक करुणामयी सिम्प बनकर सोच और अपनी कलम आत्माराम की कंपनी की आँव में कोंच!

पंच थर्रा गया, उसका गला भर्रा गया! उसने नया फैसला लिखा।नियुक्त और नियोक्ता का ऐसा ही संबंध है कि एक बार में कोई एक ही फायदे में रहता है। इम्प फायदे में है तो मतलब कंपनी नुकसान में है, कंपनी फायदा उगाह रही है तो मतलब इम्प नुकसान उठा रहा है, चूसा जा रहा है। लेकिन कंपनी इस ऑलवेज बिग। इम्प आम और केला आदमी है इसलिए इम्प को फायदा देना लाजिमी है। हो सकता है कि कंपनी को नया इम्प मिले पर टिंकी जी को अब नियुक्ति का तिनका हो सकता है कि न भी मिले!

इतना सुनते ही पंचायत में एक महिला रोने लगी…ये दर्द उसकी आँख और नाक, दोनों से छलक गया..नाक साफ करने की हड़बड़ी में गलती से नथ उतर गया…बगल में खड़ा एक चोर, सोने का नथ लेकर भाग गया…चोर, चोर का शोर हुआ, इधर न्याय बड़ा जोर हुआ! फूल बरस पड़े, निनाद बड़ा जोर हुआ।

न्याय हुआ कि टिंकी जी को आजीवन पेंशन गिनने की टेंशन दी जाए, उन्हें नई ड्यूटी की प्रेरणा हो न हो पर अपने आप को समर्थ और सार्थक बनाए रखने का दायित्व मिले। 

आत्माराम कंपनी की सीईओ तैश में खड़ी हुईं, ‘ये घर बैठे चार-चार कंपनी से पेंशन पा रही है…और हम मूर्ख हैं कि नई भर्ती करें!’

‘आप कंपनी बंद कर लो! सरकार खुद योजना बना रही है इस क्षेत्र में उतरने की, अगर टैलेंट हो तो अपना भी प्रबंध कर लो!’

पंचायत उठ गई। होम मेकर का नया स्टार्टअप शुरू हुआ, नया ऐप लॉन्च हुआ, आत्माराम की कंपनी बैठ गई और उसकी आत्मा खंडहर के पीछे इमली के पेड़ पर जाकर उल्टी लटक गई।

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