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केसरिया भारत: राष्ट्रीयता के पक्के रंगकेसरिया भारत: राष्ट्रीयता के पक्के रंग

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मूर्ख-पत्रिका

भीखू खुद को गरियाता हुआ, वापस बोरी ठीक से बिछाकर बैठ गया! एक त एक अप्रैल, ऊपर से सनीचर! साला, ग्रह, गोचर, साढ़े साती,...

जेन जी-डी-पी

बाबू जी बोले, संसार में दस अरब लोग हैं, सब के सीने पर उंगली सटाकर बोलना कि ये चोर...ये चोर...पूरी जिंदगी छोटी न पड़े,...

जेन जी-डी-पी

फिर पासार्थी का बाप आया, 'इसमें कोई टैलेंट है नहीं ददा! इकरा किताब दीजिए! साला जिंदगी भर लिख और खुद के लिखल पढ़!' उसका...

जेन जी-डी-पी

'का हो प्रजा! कैसन हाल है? ' अपदस्थ राजा, जिसे मालूम नहीं कि आज उसकी काठ की, गमछे वाली कुर्सी को उससे मोक्ष मिलने...

मूर्ख-पत्रिका

‘मोक्ष मिला, किसी ने नहीं देखा! मौज तो मिली! मुक्ति मिलेगी, कोई नहीं जानता! मस्ती तो मिली!’ उसकी बेस्टी ने उसे समझाया था। मेरी...

मूर्ख-पत्रिका

अगर आपको भूख लगे तो क्या आप लौकी के लौकी होने तक भूखे रहेंगे? तब तक हमारे कारखाने में पूरे शहर के एक महीने...

बात के बंदर

मोमकेश बक्षी जी से नहीं रहा गया। इस बार उन्होंने बेलनवाली की फोटो के सामने रखा बेलन उठाया और बड़ी ही लापरवाही से हवा...

मूर्ख-पत्रिका

इसके बाद नेतास्थान में हाहाकार मच गया। संदेश प्रचारित हो गया कि भयंकर दमन हो रहा है, भोली-भाली जनता को संख्या गणित में हराकर...

प्रस्तुति एवं COPYRIGHT © 2022 MRITYUNJAY MISHRA